Arnica Montana Benefits And Uses in Hindi

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Arnica ( आर्निका )

आर्निका होम्योपैथिक मेडिसिन चोट या आघात के कारण उत्पन्न हुए रोगो में लाभदायक है। यह दवा मष्तिस्क में प्रदाह प्रवृत्ति रखती है। यह कम रक्त वाले व्यक्तियों में मंद गति से तथा अधिक रक्त वाले व्यक्तियों में अच्छी तरह काम करती है। शोथ के रोगियों में साँस लेने में दिक्कत, शोक-चिंता या आर्थिक हानि होने के कारण आये उपद्रव में। यह पेशी बलवर्धक है। शरीर और अंगो में पीट जाने जैसा दर्द।

जोड़ो में ऐसा लगे जैसे मोच खा गए हो, बिस्तर पर लेटने पर बिस्तर बहुत कड़ा महसूस हो। यह दवा रक्त पर स्पष्ट प्रभाव डालती है। यह शिरामण्डल पर असर करके रक्त के बहाव को रोकती है। शरीर पर रक्त के जमने से आया काला दाग, रक्त की नालियों का ढ़ीलापन, काले और नीले धब्बे, मंद ज्वर की अवस्थाये, रक्तस्राव एवं तंतु नष्ट होने की प्रवृत्ति। पस आना, न पकने वाले फोड़े, रक्त जमना, पेशी और संधि तंतुओ में वात रोग, इन्फ्लुएंजा।

मन – किसी के पास आने अथवा छुए जाने का डर, अचेतनता पर जबाब ठीक दे लेकिन पुनः मूर्छा आ जाये। लगातार कोई कार्य करने में असमर्थ, उदासीनता, चिंतित, चित्त विभ्रम। अकेले रहना चाहे। मानसिक परिश्रम या आघात के बाद बड़ी जगह में अकेले रहने का डर।

सिर – आर्निका के रोगियों का सिर गरम लेकिन शरीर ठंडा होता है। मस्तिष्क में उलझन, चमड़ी सिकुड़ी लगे, तेज चुटकी काटने जैसा दर्द, टहलने पर आस पास की चीजे चक्कर खाती महसूस पड़े।

आँखे – बारीक कार्य करने के बाद आँखों में चोट लगने जैसा दर्द, आँखे खोले रखे बंद करने पर चक्कर आये, चक्षु-पट में रक्त प्रवाह, पेशिक पक्षाघात, आघातजनित द्विदृष्टि, दृश्य या सिनेमा आदि देखने पर आँखे थकी महसूस पड़े।

कान – दिमाग पर चोट लगने से कम सुनाई देना, कान से रक्त बहे, सर में रक्त के बहाव की आवाज कानो में सुनाई पड़े। कान की उप-अस्थि में रगड़ होने जैसा दर्द होना। कानो के चारो तरफ चमकन होना।

नाक – तेज खांसी के बाद नाक से खून बहना, गहरा एवं पतला रक्त, नाक में छरछराहट।

मुँह – सांस में दुर्गन्ध, मुँह सूखा रहे, प्यास लगे, मुँह के स्वाद में कड़वापन, सड़े अंडे जैसा स्वाद, दांत निकलवाने के बाद मसूड़ों का दर्द और जबड़ो के सुराख़ में पस ( मवाद ) भरना।

चेहरा – चेहरा लाल एवं मुरझाया हुआ, चहरे पर दाद, होठों में गर्मी।

आमाशय – दूध और मांस से नफरत, भूख अधिक लगना, सिरका खाने-पीने का मन करे, खाते समय पेट में दर्द। खाने का मन न करे पर पर अधिक खाना खाये। रक्त का वमन, कष्टदायक वायु का ऊपर निचे चलना, पत्थर जैसा दबाव ऐसा महसूस पड़े की जैसे आमाशय रीढ़ से टकरा रहा हो।

उदर – पसली के नीचे चिलक, दूषित वायु निकलना, आर-पार तीव्र कोंचन।

मल – अतिसार रोग में अधिक जोर लगाना ( काँखना ), मल दूषित, बादामी, खूनी, सड़ा हुआ खमीर की तरह दिखाई पड़े। क्षय रोग का दस्त पेचिस के साथ, बायीं करवट लेटने से बढे, हर बार मल त्यागने के बाद लेटना पड़े।

मूत्र – पेशाब में गहरी चटक लाल तलछट मूत्राशयविक कुंथन, दर्द के साथ।

स्त्री – यांत्रिक चोट के कारण गर्भाशय से रक्तस्राव, प्रसव के बाद तीव्र वेदना मालूम पड़े बच्चा पेट में टेढ़ा पड़ा है। चोट की वजह से आया स्तन प्रदाह, घुण्डी दर्दीली।

श्वास-तंत्र – दिल की गड़बड़ी की वजह से खांसी, सुरसुरी जो रात में ज्यादा, सोने और परिश्रम करने से बढे। तालु मुलायम, घांटी में सूजन, तालुमूल प्रदाह। निमोनिया, फेफड़े पर लकवा मारने का खतरा। ज्यादा बात करने पर आवाज का बैठ जाना। कंठनली के नीचे के भाग में गुदगुदी के कारण सुखी खांसी, रोने के कारण आई खांसी। बलगम के साथ रक्त, रक्त थूकने के साथ श्वास- कष्ट। सीने की हड्डियों में दर्द काली खासी, बच्चा खांसने के पहले चिल्ला पड़े।

दिल – ह्रदय में दर्द, बायीं केहुनी में तेज दर्द, दिल में चिलकन होना, नब्ज धीमी और क्रमहीन। दिल पर चर्बी का बढ़ना अथवा जमा होना। अंग अकड़े जैसे चोट आयी हो। घोर कष्टदायक साँस, ह्रदय रोग सम्बंधित शोथ।

अंग – अंगो में दर्द जैसे चोट लगी हो, छूने का डर, मोच लगी हो ऐसा महसूस पड़े। छोटे जोड़ो में गठिया, बांह के अगले भाग का मृत्युतुल्य ठंडापन, वात दर्द नीचे से ऊपर, वस्तिशूल के कारण सीधा न चल पाए।

चर्म – काले दाग, चर्म काला और नीला, छोटे दानों वाली फुंसियां, क्रमबद्ध उभरे कड़े मुहांसे, बिस्तर घाव ( बिस्तर पर एक ही तरफ लेटे रहने के कारण होने वाला घाव )

नींद – अधिक थके होने के कारण नींद का न आना, बेचैनी, मृत्युतुल्य उँघाई। जागने पर सिर गर्म, स्वप्न अंग-अंग के, भयानक और कौतुहलपूर्ण। रात का डर, सोते समय ( नींद में ) बिना इच्छा के मलस्खलन।

ज्वर – आंत्रिक-ज्वर की तरह लक्षण, सिर में गर्मी और लाली लेकिन बाकी शरीर ठंडा, शरीर में कपकपी, आतंरिक गर्मी पर हाथ पैर ठन्डे। रात के समय खट्टा पसीना।

बढ़ना – थोड़ा सा भी छूने से, हिलने डुलने से, आराम, शराब, नम ठंडक से।

घटना – लेटने से या सिर नीचा करने

तुलना कीजिये – एकोनाइट, बैप्टीशिया, हेमामेलिस, रसटॉक्स, हाइपेरिकम,

पूरक – एकोनाइट, इपिकाक

मात्रा – ३ से ३० शक्ति, बाहरी प्रयोग के लिए मदर टिंक्चर लेकिन छीली हुई त्वचा पर गरम करके न लगाये।

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